Wednesday, July 4, 2018

कश्मकश और उम्मीद

कश्मकश और उम्मीद


कश्मकश वो दौर है जिससे हर बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने से पहले लोगों को गुजरना पड़ता है। बड़ा लक्ष्य का अर्थ ये है कि जो लक्ष्य को हम पाना चाहते हैं, उसके लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं, उसी दरम्यान वो लक्ष्य हमें काफी बड़ा नजर आता है और लक्ष्य की प्राप्ति के पश्चाव वह छोटा लगने लगता है , लेकिन जो कभी उम्मीद नहीं छोड़ता और लगातार प्रयास करते जाता है, उसे उम्मीद से ज्यादा सफलता मिलती है।


जिन्दगी में कुछ कर गुजरने की चाहत तो सबकी होती है, लोग मेहनत भी करते हैं, असफल भी होते हैं फिर से कोशिश करते हैं, फिर असफल होते हैं और कोशिश करते हैं अंततः सफल हो ही जाते हैं। लेकिन कभी-कभी जिन्दगी में एैसा दौर आता है जब हमें कुछ समझ नहीं आता कि आगे क्या किया जाए, जो कर रहे हैं वो सही है या नहीं, अगर सही है तो उसे आगे करने का मन क्यों नहीं हो रहा, और क्या वो गलत है तो क्या वो इतना गलत था कि आज उसे करने का मन ही नहीं हो रहा। बार-बार मिलती हार से हौसले बिल्कुल पस्त हो जाते हैं, और कुछ समझ नहीं आता कि क्या किया जाए, और ये वही लमहा है जब हम इस कश्मकश में फंस जाते हैं कि कोशिश करें या न करें।


     इसी कश्मकश के दौरान हम अपने आप से हमेंशा ये पूछते हुए रहते हैं कि क्या ये इतनी विपरित परिस्थितियां है ? क्या एैसा सबके साथ होता है ? क्यों मै इतना बेचैन सा रहने लगा हूं और आखिर मेरी कोशिशों में कहां कमी रह गई ? जिन्दगी में कुछ दूर चलने के बाद मै क्यूं बार-बार इन्ही कश्मकश भरी परिस्थिति में पहुंच जाता हूं, जिसमें मै बिल्कुल ये नहीं सोंच पा रहा कि आगे क्या करना है।


वो पल जब हम सोंचते हैं-


जो भी रास्ते नजर आते कुछ सोंच कुछ समझ के साथ लगातार आगे बढ़ता चला जाता हूं, हार मिलती है सह भी जाता हूं, फिर उम्मीद बांध कर पूरा प्रयास करता हूं लेकिन फिर हार जाता हूं, लेकिन फिर किसी उम्मीदमय वातावरण में अपने आप को सम्भालकर फिर से कोशिशों में जुट जाता हूं, लेकिन फिर हार जाता हूं, एक के बाद एक हार और एक समय के पश्चात फिर कश्मकश में खो जाता हूं। उसके बाद मन में ख्याल आता है कि नसीब किसी चिड़िया का नाम है, कुछ जीतने वालों में तो काबिलियत मेरे बराबर भी नही फिर मेरा ये हष्र क्यों ? आखिर और क्या करना होगा आगे, जिससे सफलता आखिर कदम चूम ही ले, रात में इन्ही विचारों में खोए हुए फिर किसी तरह नींद आ जाती।


फिर उम्मीद की किरण, नए सबेरे के संग-


कहते हैं जिसके जीवन में संकल्प है उसके जीवन में विकल्प नहीं है, इसलिए अगला दिन फिर एक नयी सुबह की किरण, नयी उम्मीदें लेकर आती है और फिर से कोशिशों में लग जाता हूं। उम्मीद का दामन कभी नही छोड़ना चाहिए, कोशिश लगातार करते रहने से एक न एक दिन बड़ी कामियाबी अवश्य ही मिलती है।


असफलताओं के बाद मिलती है बड़ी सफलता -


अक्सर हमने देखा है कि जो कई बार असफल होने के बाद जो सफल होते हैं, वो अपनी उम्मीद से ज्यादा सफल हो जाते हैं। जो बार-बार असफलता के बाद भी कोशिशें करता जाता है, उनको खुद नहीं पता होता कि वो कितने ज्यादा काबिल होते जा रहे है, काफी दिनों तक संघर्ष के दौरान अपने लक्ष्य के अलावा भी आपको कुछ न कुछ करते रहना पड़ता है, और किसी भी तरह का काम हमे कुछ न कुछ जरूर सीखाते जाता है। इसलिए जब सफलता मिलती है तो वह उम्मीद से ज्यादा मिलती है।


जिसके जीवन में संकल्प है, उसके जीवन में विकल्प नहीं । इसलिए अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहें, और लगातार प्रयास करते रहें, कभी-कभी परिस्थितियां भी विपरित होती है, लेकिन जितना भी आप करें पूरी लगन और ईमानदारी से करें, सफलता उम्मीद से अधिक ही मिलेगी।


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